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"महकता सावन"

महकता सावन अब आ ही गया
अब तो शरम का परदा हटाओ सनम।


दिन आ ही गये हैं बहारों के जब
अब तो खुलकर मुस्कुराओ सनम।


याद आएँ जो मेरी वो यादें हँसी
तो प्यार का एक गीत गुनगुनाओ सनम।


पास आके हुआ तेरे बेचैन मैं
अब यूँ ही चुप सी ना लगाओ सनम।


"राना" मर जाएगा अब तेरी याद में
वादा अपना यूँ ही ना तोड़ जाओ सनम।


"कैसे कहूँ"

दिल में इक तूफान उठता है
जब याद तुम्हारी आती है

मन में बेचैनी उठती है
जब बात तुम्हारी आती है

होंठो से हँसी आँखों से चमक
उस पल गायब हो जाती है

जब तुम गैरों से मिलते हो
दिल मे बदरी छा जाती है


गैरों से तुम्हारी की बातें
इन साँसों को छू जाती है


कोयल की कूक चिड़ियों चहक
"राना" को लुभा ना पाती है


मेरे हमदम तुम्हारी ये हरकत
कैसे कहूँ सताती है





मैने तुमसे सीखा है

बहुत ही देर से जाना
अभी जो लौट आए हो,
ये मैने तुमसे सीखा है
मोहब्बत झूठ होती है
ये खुद से दूर करती है
एक नासूर होती है
बहुत मजबूर करती है
बहुत ही देर से जाना
अभी जो लौट आए हो,
ये मैने तुमसे सीखा है
कभी तुम इश्क़ न करना
ये दिल को तोड़ देता है
बहुत मगरूर होता है
अकेला छोड़ देता है
बहुत ही देर से जाना
अभी जो लौट आए हो,
ये मैने तुमसे सीखा है
किसी को छोड़कर जाना
नही फिर लौटकर आना
बहुत ही बेरूख़ी करना
किसी के दिल मे ना रहना
बहुत ही देर से जाना
अभी जो लौट आए हो,
तो बस इतना ही जाना है
मोहब्बत रूह होती है
कभी भी दूर जाने से
मोहब्बत रूठ जाती है
हमें वापस बुलाती है
बहुत ही देर से जाना
अभी जो लौट आए हो,